हां, लंबे समय तक बढ़ा हुआ प्रोस्टेट ब्लैडर की ताकत पर असर डाल सकता है। इसे समझने के लिए पेशाब की प्रक्रिया जानना मददगार है। प्रोस्टेट मूत्रनली को घेरे रहता है, इसलिए उसके बढ़ने पर रास्ता संकरा हो जाता है।
रास्ता तंग होने पर ब्लैडर को पेशाब बाहर निकालने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। शुरुआत में उसकी दीवार मोटी हो जाती है और वह ज्यादा संवेदनशील बन जाता है। इसी कारण बार-बार urge आती है। सालों तक यह दबाव चले तो मांसपेशियां थकने लगती हैं और ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं कर पाता।
कमजोर ब्लैडर के संकेत
पेशाब के बाद भी भरा-भरा महसूस होना
धार बहुत धीमी या रुक-रुककर आना
पेट पर जोर देकर पेशाब करना
दिन-रात बार-बार जाना
अनजाने में कुछ बूंदें निकल जाना
बचा हुआ पेशाब क्यों खतरनाक है
ब्लैडर में रुका पेशाब इन्फेक्शन और पथरी का जोखिम बढ़ाता है। लंबे समय बाद किडनी पर भी दबाव पड़ सकता है। यूरिन रिटेंशन की यह स्थिति धीरे-धीरे बनती है, इसलिए शुरुआत में पता नहीं चलता।
समाधान क्या है
जांच के बाद डॉक्टर तय करते हैं कि दवाइयां काफी होंगी या प्रक्रिया की जरूरत है। प्रोस्टेट का दबाव समय पर हटे तो कई मामलों में ब्लैडर की कार्यक्षमता में सुधार दिखता है। अगर आप बढ़े हुए प्रोस्टेट का उपचार इंदौर (Enlarged Prostate Treatment in Indore) या ब्लैडर की समस्या का इलाज इंदौर (Bladder Problem Treatment in Indore) तलाश रहे हैं, तो यूरोलॉजिस्ट की सलाह से अल्ट्रासाउंड और रेजिडुअल यूरिन जांच जरूर करवाएं।






